black fungus symptoms

BLACK FUNGUS: ब्लैक फंगस क्या है, कैसे फैलता है, लक्षण, बचाव और इलाज क्या है?

ब्लैक फंगस (BLACK FUNGUS)क्या है?

म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) ब्लैक फंगस/ BLACK FUNGUS का दूसरा नाम है। यह एक सीरियस फंगल इन्फेक्शन है, जो की mucormycetes से होती है। आमतोर पर यह फंगस हमारे वातावरण में पाई जाती है जैसे मिटटी, गले हुए पत्ते, कम्पोस्ट पाइल्स, सड़ी-गली आर्गेनिक चीज़े, पशु खाद। यह बीमारी हमारे शरीर में सांस की नाली के द्वारा और चोट, खरोंच आदि से प्रवेश करती है। 

ब्लैक फंगस के लक्षण क्या है?

ब्लैक फंगस शरीर के जिस हिस्से में इन्फेक्शन करता है, उसी हिस्से के लक्षण दिखाता है।
1 सांस की नली और दिमाग में इन्फेक्शन :-
– चेहरे के एक हिस्से में सूजन या दर्द
– सर में दर्द
– साँस लेने में दिक्कत
– बंद नाक
– छाती में दर्द
– खांसी
– साँस उखड़ना
– नाक पर काले धब्बे
– बुखार
– आँखों से धुन्दला दिखाई देना
– दांत हिलने लगे

2 शरीर में त्वचा के द्वारा :-
– घाव छाले की तरह दिखना
– घाव का काला पढ़ना
– सूजन
– दर्द
– घाव वाली जगह का गर्म होना और लाल पड़ना
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3 गैस्ट्रोइंटेस्टिनल यानि पेट के द्वारा :-
– पेट दर्द
– गबराहट
– उलटी होना
– उलटी या मल में खून आना

4 रक्त के द्वारा शरीर में फैलना – यह उन लोगों में होता है जिनको पहले से कोई बीमारी है। जिसके चलते ब्लैक फंगस के लक्षण को पहचान पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दिमाग की मानसिक स्थिति में बदलाव आता है और कई बार मरीज़ कोमा में चला जाता है।

किन लोगों को है ब्लैक फंगस/ म्यूकरमाइकोसिस से सबसे ज़्यादा खतरा?

कुछ परिस्थितयों को छोड़ कर यह लोगों के लिए कोई समस्या नहीं है। यह बीमारी एक रेयर यानि असाधारण बीमारी है। पर जो लोग पहले से ही किसी बीमारी के शिकार है या लम्बे समय  से उनकी दवाई चल रही है। इस स्थिति में उनके शरीर में इन्फेक्शन से लड़ने की ताकत कम हो जाती है। सरल भाषा में यह बीमारी उन लोगों को अपनी चपेट में लेती है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। फिर उनको ब्लैक फंगस होने की संभावना बढ़ जाती है।

1 शुगर की बीमारी के मरीज़
2 कैंसर के मरीज़
3 जिनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर है
4 किडनी की बीमारी
5 लिवर की बीमारी
6 जो लम्बे समय से इम्यून सुप्प्रेसेंट की दवा ले रहा है
7 शरीर में आयरन का ओवरलोड होना
8 घाव का होना जैसे ऑपरेशन से, बर्न यानि चमड़ी जलने से या चोट लगने से
9 कोरोना के मरीज

क्या ब्लैक फंगस/ म्यूकरमाइकोसिस कोरोना से भी ज्यादा घातक है?

जी हाँ ब्लैक फंगस, कोरोना से भी ज़्यादा घातक है। वह इस लिए जब कोरोना होता है वह केवल फेफडों पर हमला करता है। दूसरी तरफ ब्लैक फंगस, एक फंगल इन्फेक्शन है जो की शरीर के किसी भी हिस्से में हमला करती है जैसे आंख, नाक, फेफड़े, गला, दिमाग आदि। पर आपको घबराने की ज़रुरत नहीं है, क्यूंकि सामान्य सावधानी से इस बीमारी से बचा जा सकता है।

BLACK FUNGUS से बचने के उपाय
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इस बीमारी से बचने के लिए हमे नीचे बताई बातों का ध्यान रखना चाहिए:

1 दांतों की सफाई रखना और गरारे करना – ऐसा करने से हम बीमारी को मुँह में फैलने से रोक सकते है।
2 जब किसी मरीज़ को ऑक्सीजन देते हैं तो उसके हुमिडिफिएर में नल के पानी का इस्तैमाल न करे, उसमें फिलटर के पानी का प्रयोग करे।
3 जो लोग स्टेरॉइड्स की दवा ले रहे है वो अपने डॉक्टर की सलाह ज़रूर ले और अपना शुगर जाँच टाइम – टाइम से करवाते रहे।
4 किसी भी प्रकार की दवाई जैसे एंटीबायोटिक्स, एंटीफंगल आदि डॉक्टर की पर्ची और सलाह के बिना न ले।
5 शुगर के मरीज़ अपने शरीर में चीनी की मात्रा बढ़ने न दे। अपने ब्लड शुगर सत्तर को कंट्रोल में रखने का अधीक प्रयास करे।

6 धुल मिटटी भरी जगह पर मास्क पहने और हो सके तो ऐसी जगह पर जाने से परहेज करे।
7 अपने हाथों को धोए। 
8 पानी से क्षतिग्रस्त इमारतों के सीधे संपर्क में न जाए।
9 बगीचे या मिट्टी में काम करते समय ग्लवस और जूत्ते पहने।
10 शरीर पर कोई खरोंच या कट लगने से उससे तुरंत साबुन और पानी से धोये।
11 इम्युनिटी को बूस्ट करने के लिए घरेलु नुस्खे अपनाए और अदरक, लसून, काली मिर्च, हल्दी आदि का प्रयोग करें।

म्यूकरमाइकोसिस/ BLACK FUNGUS क्या है इलाज?

डॉक्टर र.स. बोलिंगर और उनके साथिओं के हिसाब से ब्लैक फंगस का इलाज बहुत ही तेजी और आक्रामक तरीके से किया जाता है। सबसे पहले अगर मरीज़ को डायबिटीज यानि शुगर है तो उसे कंट्रोल किया जाता है। उसी तरह,अगर मरीज़ कोई स्टेरॉइड्स ले रहा है तो उस दवा की मात्रा को धीरे-धीरे कम किया जाता है।एन्टीफंगल दवाइयों की मदद से मरीज़ का इलाज किया जाता है। फिर भी, कई मरीज़ों में तो इन्फेक्शन इतना बढ़ जाता है की ऑपरेशन द्वारा सक्रिमित अंग को निकल दिया जाता है। लगभग 40% मामले साइनस यानी वायुविवार के होते है, जो यह इन्फेक्शन दिमाग में फैला देते है। कुछ मामलो में आंख और जबड़ा भी निकालना पड़ता है।

क्या Homeopathic (होम्योपैथिक) दवायें इस बीमारी से लड़ने में मदद करती है?

जी हाँ, अब AYUSH विभाग (आयुर्वेदा, योगा और नेचुरोपैथी, यूनानी, सिध्धा और होम्योपैथिक) में होम्योपैथिक प्रोटोकॉल बनाया गया है, ब्लैक फंगस से बचाने के लिए। यह कोरोना के मरीज़ों के लिए बहुत अच्छी बात है, क्योकि उनकी बीमारीओं से लड़ने की शक्ती कम हो जाती है। होम्योपैथिक दवाइओं से उनके इम्यून सिस्टम को बूस्ट होने में मदद होगी और आगे किसी अन्य इन्फेक्शन से बचने में मदद होगी। इसमें मरीज़ के लक्षणों के आधार पर दवाई दी जाएगी।

निष्कर्ष: इस बीमारी से बचने के लिए हमे और खास कर कोरोना के मरीज़ों को अपनी इम्युनिटी बूस्ट करनी चाहीए। इसकी रोक -थाम के लिए डॉक्टरों द्वारा बताई गई बातों का ध्यान रखना चाहीए इसके अलावा,अपने खाने का, साफ़- सफाई का भी ध्यान रखें। ऐसा करने से हम सब बीमरी को बढ़ने से रोक सके। अगर आप को ब्लैक फंगस के कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत बिना किसी देरी के अपने डॉक्टर से सम्पर्क करे। घर पर बैठ कर खुद से डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवाई ना ले, क्यूंकि आपकी सावधानी ही आपका बचाव है। अपना और अपने परिवार का ध्यान रखे ।

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